मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन यात्रा में इस बार कुछ ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सबका दिल जीत लिया।इन्हौना चौराहे से शुरू होकर रत्नेश्वर मंदिर होते हुए आदि गंगा गोमती के पावन तट रीक्षघाट तक पहुंची इस भव्य विसर्जन यात्रा में, हर कदम पर भक्ति और उल्लास का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला।इस दौरान सरफराज प्रधान प्रतिनिधि ने एक सच्चे इंसानियत के सिपाही की तरह पूरे आयोजन में अपनी भूमिका निभाई और यह साबित कर दिया कि मजहब कभी दीवार नहीं बनता, इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।उन्होंने विसर्जन यात्रा के दौरान भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भोजन करवाया।जैसे ही मां दुर्गा की मूर्तियां यात्रा मार्ग से गुज़रीं, सरफराज और उनकी पूरी टीम ने उन पर फूलों की वर्षा कर भावनाओं का अमृत बरसा दिया।फूलों की बारिश के बीच श्रद्धालु झूम उठे, और पूरा वातावरण भक्ति, भाईचारे और एकता के रंग में रंग गया।सरफराज ने स्वयं माला पहनाकर हिंदू भाइयों का स्वागत किया और यह संदेश दिया कि धार्मिक पर्व किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि समाज की एकता और प्रेम का प्रतीक होते हैं।हर धार्मिक और सामाजिक कार्य में उनकी यही सक्रियता और सर्वधर्म सद्भाव की भावना उन्हें क्षेत्र की जनता के बीच एक आदर्श प्रतिनिधि बनाती है।लोगों का कहना है कि आज के समय में जब समाज में छोटी-छोटी बातों पर मतभेद फैलाए जा रहे हैं, ऐसे में सरफराज प्रधान प्रतिनिधि ने जो उदाहरण पेश किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।ऐसे प्रधान प्रतिनिधि को इन्हौना की जनता की ओर से हार्दिक सम्मान और धन्यवाद।उन्होंने यह साबित कर दिया कि जब मन में सच्ची नीयत और दिल में इंसानियत हो, तो कोई भी फर्क मायने नहीं रखता।
