लखनऊ। थाना निगोहां के अपराध संख्या 108/2025 में दर्ज पाक्सो एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के मामले में एडीजे/विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, लखनऊ की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप सिद्ध न किए जाने पर अभियुक्त कैलाश को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य अभियोजन के आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
मामले के अनुसार, 28 जून 2025 को कैलाश की मां सुंदरा देवी ने थाना निगोहां में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कैलाश ने उनके साथ मारपीट की, जिससे वह बेहोश हो गईं और पड़ोसियों की मदद से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि कैलाश नशे का आदी है तथा अपनी लगभग 10 वर्षीय बेटी पर गलत नजर रखता है और उसके साथ अनुचित हरकतें करता है। विरोध करने पर उसने अपनी मां के साथ मारपीट की। इन आरोपों के आधार पर बीएनएस की धाराओं 115(2), 352, 351(2), 110, 74 तथा पाक्सो एक्ट की धारा 9 एवं 10 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष न्यायालय में आरोपों को ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध नहीं कर सका। सभी गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन का मामला संदेह से परे प्रमाणित नहीं हो सका। इसी आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त कैलाश को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता अजीत प्रताप सिंह यादव ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने बताया कि मामले का विचारण लगभग छह माह के भीतर पूरा हुआ और न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषमुक्त करने का निर्णय दिया। कैलाश जून 2025 से जिला कारागार में निरुद्ध था। न्यायालय के आदेश के बाद अब वह रिहा होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर सकेगा।
